तुमसे मिलने को जी चाहता है दिल से दिल मिलाने को जी चाहता है देखो आ गया प्यार का मौसम सनम इस मौसम में तुम्हारे संग रहने को जी चाहता है हवाओ के संग झूमने को जी चाहता है फूल की तरह खिलने को जी चाहता है खुशबू बन महकने को जी चाहता है देखो आ गया प्यार का मौसम सनम इस मौसम में तुम्हारे संग रहने को जी चाहता है होंठ से होंठ मिलाने को जी चाहता है होंठो की लाली चुराने को जी चाहता है तुझमे टूट जाने को जी चाहता है करो न तुम भी याद इस ज़माने में किसी को तुझे इस तरह चाहू जी चाहता है देखो आ गया प्यार का मौसम सनम इस मौसम में तुम्हारे संग रहने को जी चाहता है फरवरी की ठण्ड और उसपर प्यार का मौसम सनम आज मदहोश हो जाऊ जी चाहता है जलता दिया बुझाऊ जी चाहता है बुझता दिया जलाऊ जी चाहता है तेरी जुल्फों में उलझ जाऊ जी चाहता है तुझे खुद में उलझाऊ जी चाहता है देखो आ गया प्यार का मौसम सनम इस मौसम में तुम्हारे संग रहने को जी चाहता है |
सोमवार, 13 फरवरी 2012
आ गया प्यार का मौसम
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खुबसूरत पोस्ट।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह ...बहुत बढि़या।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही बढ़िया ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसादर
कल 14/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
प्रत्युत्तर देंहटाएंधन्यवाद!
जो जी चाहे करिये...रोकता कौन है...
प्रत्युत्तर देंहटाएंमौका भी है दस्तूर भी है...
:-)
सुन्दर रचना रीना जी....
शुभकामनाएँ.
nashe se bhara mausam ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंतेरी जुल्फों में उलझ जाऊ जी चाहता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंतुझे खुद में उलझाऊ जी चाहता है
..........प्यार में उलझना भी बहुत जरूरी है
प्रशंसनीय रचना रीना जी- बधाई
इस मौसम में तुम्हारे संग
प्रत्युत्तर देंहटाएंरहने को जी चाहता है
..बिल्कुल सच कहा बड़ी मीठी सी रचना..... :)
हवाओ के संग झुमने को जी चाहता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंफुल की तरह खिलने को जी चाहता है
खुशबु बन महकने को जी चाहता है
Bahut achhi abhibaykti , basnt ka asar dikh raha hai
Hari Attal
प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति........
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर रचना रीना जी। शुभकामनाएँ । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंलाजवाब फोटो लगाए हैं आपने।
प्रत्युत्तर देंहटाएंकविता के भाव मन को आकर्षित करते हैं।
sab taraf valentine's day ka bharpoor asar hai .. :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंsundar rachna
palchhin-aditya.blogspot.in
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut accha ji ,,,,,wahhhhhhhhhhhh
प्रत्युत्तर देंहटाएंvelentine ke awsar pr acchi or sundar prastuti.
अनुभूति की सुन्दर रचना
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत उम्दा!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंnice :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन अभिव्यक्ति.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर रचना
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रेमदिवस की शुभकामनाये,
wah........mast rachna....njoyed every line
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह बेहद खूबसूरत ...बहुत खूब
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोंठ से होंठ मिलाने को जी चाहता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोंठो की लाली चुराने को जी चाहता है
तुझमे टूट जाने को जी चाहता है
करो न तुम भी याद इस ज़माने में किसी को
तुझे इस तरह चाहू जी चाहता है
देखो आ गया प्यार का मौसम सनम
इस मौसम में तुम्हारे संग
रहने को जी चाहता है
WAH ...TAREEF KE SHBD KM PAD JAYENGE...PREM DIWAS PR SHUBHKAMNAYEN
bahut khoobsurat pyarbhara tarana ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहद खुबशुरत बहुत अच्छी रचना,सुंदर प्रस्तुति ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंचित्र अच्छा लगा
MY NEW POST ...कामयाबी...
प्यार का कोई मौसम नहीं होता,
प्रत्युत्तर देंहटाएंऐसी फ़स्ल है जो कभी पकती नहीं है !
बहुत ही खूबसूरत रचना..सुंदर प्रस्तुति ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंहवाओ के संग झुमने को जी चाहता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंफुल की तरह खिलने को जी चाहता है
खुशबु बन महकने को जी चाहता है
Bahut acha likha aapne..
अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आ कर |
प्रत्युत्तर देंहटाएंआशा
ठीक यही भाव हमारे भी हैं।
हटाएंमधुर प्रणय निवेदन ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन प्रस्तुति.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंकृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या(भाग-2)
भावपूर्ण अभिव्यक्ति....सराहनीय.......
प्रत्युत्तर देंहटाएंकृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)
Waah premmayi rachna............
प्रत्युत्तर देंहटाएंKYA BAT HAI PYAR KE MOUSAM MEN AAPKI ICHCHA ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंnice post
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह!!!!!भावपूर्ण बहुत अच्छी अभिव्यक्ति,सराहनीय प्रस्तुति,..
प्रत्युत्तर देंहटाएंMY NEW POST ...सम्बोधन...
हवाओ के संग 'झुमने' को जी चाहता है
प्रत्युत्तर देंहटाएं'फुल' की तरह खिलने को जी चाहता है
'खुशबु' बन महकने को जी चाहता है
मुग्धा भाव की रचना .कृपया वर्तनी पर गौर करने .
झूमने ,फूल ,ख़ुशबू शुद्ध रूप हैं ..अच्छी पोस्ट .बधाई .
धन्यवाद सर ,,
हटाएंआपने इतने गौर से मेरी रचना को पढ़ा
अपना समय दिया...
ग़लतिया सुधार ली है ...:-)
ब्लॉग पर आपका स्वागत है :-)
behatreen post ki badhai ke sath amantran sweekaren reena ji
प्रत्युत्तर देंहटाएंमधुर गीत ... जैसे प्यार की ठंडी बयार बह रही हो ... लाजवाब गीत है ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंprem ki kavita prem ko samarpit...sundar kavita ke liye badhai.
प्रत्युत्तर देंहटाएंsundar prastuti
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बढ़िया,बेहतरीन अच्छी प्रस्तुति,.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंMY NEW POST...आज के नेता...
बहुत बहुत सुन्दर..
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रेमपगी सुंदर रचना ! बधाई
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