अरमानो के चाँद -सितारों से सजा दी है देखो ये माथे की बिंदिया दमके बालों में सजा गजरा महके दुल्हन बन मै हूँ तैयार ले आओ साजन अब तुम बारात हरी चूड़िया पहन मै आई मेहंदी से तेरा नाम भी रचवाई चाँदी की पायल बनवाई इसे पहन तुम्हारे संग फेरों की मै आस लगाए दुल्हन बन मै हूँ तैयार ले आओ साजन अब तुम बारात आँखों का कजरा शरमाए होंठो की लाली मुस्काए ख़ुशबू से तन महका जाए तेरे प्रेम को मन तरसा जाए ये सोलह शृंगार कहीं उतर ना जाए देखो अब कराओ ना इंतजार दुल्हन बन मै हूँ तैयार ले आओ साजन अब तुम बारात |
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शनिवार, 4 फरवरी 2012
दुल्हन बन मै हूँ तैयार ले आओ साजन अब तुम बारात
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इतने मीठे प्रलोभन...
प्रत्युत्तर देंहटाएंकैसे ना आयेंगे साजन...
बहुत सुन्दर रीना जी..
सस्नेह.
वाह खूबसूरत भाव पिरोती कविता शुभकामनाएं
प्रत्युत्तर देंहटाएंरीना मोर्य जी नमस्कार,
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपने बहुत ही प्यारी कविता लिखी है पढ़कर बहुत अच्छा लगा और सच बात ये है कि मैंने पहली पंक्ति पढ़ते ही आपको ये लिखा है बांकी मैं कमेन्ट देने के बाद पढूंगा...
धन्यवाद एवं आभार
मुकेश गिरी गोस्वामी
http://mukesh4you.blogspot.in/
रीना मोर्य जी नमस्कार,
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपने बहुत ही प्यारी कविता लिखी है पढ़कर बहुत अच्छा लगा और सच बात ये है कि मैंने पहली पंक्ति पढ़ते ही आपको ये लिखा है बांकी मैं कमेन्ट देने के बाद पढूंगा...
धन्यवाद एवं आभार
मुकेश गिरी गोस्वामी
http://mukesh4you.blogspot.in/
आँखों का कजरा शरमाए
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोंठो की लाली मुस्काए
ख़ुशबू से तन महका जाए
तेरे प्रेम को मन तरसा जाए
wah reena ji kya khoob likha hai apne ....dulhan ki bhavnaon ka lajabab chitran...es behatareen rachana ke liye badhai sweekaren reena ji.
आपका बहुत धन्यवाद ...
हटाएंबहुत ही प्यारी कविता.
प्रत्युत्तर देंहटाएंपढ़कर अच्छा लगा.
प्यारे कोमल भाव.....सुंदर कविता
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढिया रचना।
प्रत्युत्तर देंहटाएं.... इस तरह बुलाएंगी तो आना ही पडेगा उसे......
कोमल भाव की प्यारभरी प्रस्तुति.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत खूबसूरत लिखा है रीना जी।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन कविता।
सादर
कल 06/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
प्रत्युत्तर देंहटाएंधन्यवाद!
धन्यवाद यशवंत जी ...
हटाएंआपका बहुत - बहुत आभार ..
thodaa saa sabr rakho
प्रत्युत्तर देंहटाएंsaajan bhee aayenge
dulhan ko le jaayenge
umdaa......................
waah! kya baat hai,sundar aur pyaari rachna hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंकोमल भावों से सजी कविता
प्रत्युत्तर देंहटाएंकोमल मन की अभिलाषा ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर |
रीना जी...क्या लिखती हैं आप...आपकी रचनाएँ दिल को छू लेतीं हैं.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंजय जी आपको मेरी रचना अधिक पसंद आई ये मेरे लिए ख़ुशी की बात है..
हटाएंधन्यवाद ...
बहुत खुबसूरत और प्यारी कविता...बहुत अच्छी लगी..
प्रत्युत्तर देंहटाएंकाश ! सजन तक आपकी बात पहुँच जाए ! अच्छी अभिव्यक्ति !
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन प्रस्तुति!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंइतने मनुहार से बुलाएंगी तो उन्हें आना ही पड़ेगा.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमन को छूती कोमल भावों की अभिव्यक्ति.
अब इतने खुबसूरत अंदाज़ में आप बुलायंगी तो क्यों नही आयेगे..... उन्हें तो आना ही पड़ेगा ना...... बहुत ही अच्छी......रचना
प्रत्युत्तर देंहटाएंSundar Rachna. Badhiya prastuti.
प्रत्युत्तर देंहटाएंsundar prastuti...
प्रत्युत्तर देंहटाएंwah wah shaadi ki itni jaldi :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut pyari rachna....
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह.....अगर बननी इतने प्यार से श्रृंगार करके मनुहार करेगी तो बन्ना कब तक बारात लेकर नहीं आएगा :-)
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही प्यारी कविता लिखी है रीना जी..बहुत सुन्दर..
प्रत्युत्तर देंहटाएंआँखों का कजरा शरमाए
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोंठो की लाली मुस्काए
ख़ुशबू से तन महका जाए
तेरे प्रेम को मन तरसा जाए
एक सहज भाव अभिव्यक्त किया है आपने जो हर बाला के मन में होता है विवाह से पहले ....बेहतर रचना ..!
गहरे भावों से भरी सुंदर प्रस्तुति.......
प्रत्युत्तर देंहटाएंपुरवईया : आपन देश के बयार
niceeeeeeeee
प्रत्युत्तर देंहटाएंआई या नहीं बारात .....?
प्रत्युत्तर देंहटाएं:))
बहुत प्यारी मनुहार ....
इसे सरिता में भेज दीजिये वहां ऐसी कविताओं को प्रमुखता दी जाती है .....
हरी चूड़िया पहन मै आई
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेहंदी से तेरा नाम भी रचवाई
चाँदी की पायल बनवाई
इसे पहन तुम्हारे संग
फेरों की मै आस लगाए
दुल्हन बन मै हूँ तैयार ...
प्रेम रस में रंगी ... उनके रंगों में डूबी लाजवाब रचना ...
आँखों का कजरा शरमाए
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोंठो की लाली मुस्काए
ख़ुशबू से तन महका जाए
तेरे प्रेम को मन तरसा जाए
बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
आभार !
आगामी शुक्रवार को चर्चा-मंच पर आपका स्वागत है
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी यह रचना charchamanch.blogspot.com पर देखी जा सकेगी ।।
स्वागत करते पञ्च जन, मंच परम उल्लास ।
नए समर्थक जुट रहे, अथक अकथ अभ्यास ।
अथक अकथ अभ्यास, प्रेम के लिंक सँजोए ।
विकसित पुष्प पलाश, फाग का रंग भिगोए ।
शास्त्रीय सानिध्य, पाइए नव अभ्यागत ।
नियमित चर्चा होय, आपका स्वागत-स्वागत ।।
well done reena kya khub armaano ko pesh kiya hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रस्तुति अच्छी लगी । इस लिए अनुरोध है कि एक बार समय निकाल कर मेरे पोस्ट पर आने का कष्ट करें । धन्यवाद । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर शब्दों से सुसज्जित लाजवाब रचना लिखा है आपने! उम्दा प्रस्तुती!
प्रत्युत्तर देंहटाएंक्या बात है ! सुन्दर रचना.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप बहुत अच्छा लिखते हो!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबधाई!
सुन्दर शब्दों से सुसज्जित लाजवाब रचना| एक बार समय निकाल कर मेरे पोस्ट पर आने का कष्ट करें । धन्यवाद । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रत्युत्तर दें
बहुत बढि़या।
प्रत्युत्तर देंहटाएंएक खूबसूरत रचना और सुन्दर शब्द चयन |
प्रत्युत्तर देंहटाएंआशा
बहुत सुन्दर रचना, ख़ूबसूरत भावाभिव्यक्ति , बधाई.
प्रत्युत्तर देंहटाएंBahut pyaree rachana hai!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर शब्दों से सजी प्यारी कविता!
प्रत्युत्तर देंहटाएंमीठी मीठी कविता..
प्रत्युत्तर देंहटाएं